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सामान्य अध्ययन–3: बुनियादी ढाँचा: विमानपत्तन आदि; भारतीय अर्थव्यवस्था तथा नियोजन, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।

संदर्भ: 21 अक्टूबर 2026 को क्षेत्रीय संपर्क योजना (RCS)-उड़ान (UDAN) के दस वर्ष पूरे हुए। इस दौरान इस योजना ने भारत में क्षेत्रीय हवाई संपर्क का विस्तार किया है, जबकि संशोधित उड़ान योजना का उद्देश्य अवसंरचना संबंधी कमियों को दूर करना तथा क्षेत्रीय विमानन की दीर्घकालिक स्थिरता में सुधार करना है।

UDAN (उड़े देश का आम नागरिक) के बारे में

  • शुरुआत: नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति (NCAP), 2016 के अंतर्गत 21 अक्टूबर 2016 को इस योजना की शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य हवाई यात्रा को किफायती बनाना तथा हवाई संपर्क से वंचित और अपर्याप्त हवाई संपर्क वाले क्षेत्रों को जोड़ना है।
  • पहली उड़ान: उड़ान योजना के अंतर्गत पहली उड़ान 27 अप्रैल 2017 को शिमला और दिल्ली के बीच संचालित हुई।
  • कार्यान्वयन तंत्र: यह योजना बाजार-आधारित मार्ग चयन, हवाई किराए की अधिकतम सीमा, रियायतों तथा व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) का
  • त्रि-आयामी दृष्टिकोण:
    • केंद्र–राज्य/केंद्रशासित प्रदेश समन्वय: विमानन अवसंरचना के विकास में समन्वय स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार, भाग लेने वाले राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों तथा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के बीच कुल 21 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए।
    • चुनौती-आधारित पोर्टल: यह राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासनों को क्षेत्रीय हवाई संपर्क की आवश्यकताओं के आधार पर विकास हेतु हवाई पट्टियों और हेलीपैडों का नामांकन करने की सुविधा प्रदान करता है।
    • सतत क्षेत्रीय हवाई संपर्क: क्षेत्रीय विमानन की दीर्घकालिक व्यवहार्यता में सुधार के लिए अवसंरचना विकास, परिचालन सहायता और स्वदेशी विमानन क्षमता को एकीकृत करता है।

उड़ान योजना की प्रमुख उपलब्धियाँ

  • हवाई संपर्क का विस्तार: 687 क्षेत्रीय हवाई मार्गों और 95 हवाई अड्डों/हवाई अड्डा सुविधाओं को परिचालन में लाया गया, जिनमें 17 हेलीपोर्ट और दो जल हवाई अड्डे शामिल हैं।
  • यात्रियों एवं उड़ानों में वृद्धि: लगभग 1.72 करोड़ यात्रियों को ले जाने वाली 3.68 लाख से अधिक उड़ानों के संचालन में सहायता प्रदान की गई।
  • पूर्वोत्तर क्षेत्र में हवाई संपर्क: 90 प्राथमिकता वाले क्षेत्रीय हवाई मार्गों को परिचालन में लाया गया। इस क्षेत्र में चिह्नित 52 हवाई अड्डों में से 12 को परिचालन में लाया गया।
  • क्षेत्रीय विकास: पूर्णिया, तेजू, देवघर और किशनगढ़ जैसे हवाई अड्डों के माध्यम से पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाओं और कृषि बाजारों तक पहुँच में सुधार हुआ।
  • वित्तीय सहायता: क्षेत्रीय हवाई मार्गों पर विमानन कंपनियों के संचालन को समर्थन देने के लिए 15 अक्टूबर 2026 तक व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) के अंतर्गत ₹5,091.23 करोड़ वितरित किए गए।

उड़ान योजना की कमियाँ एवं चुनौतियाँ

  • हवाई मार्गों का बंद होना: उपलब्ध उद्योग विश्लेषण के अनुसार, उड़ान योजना के पूर्ववर्ती चरणों के अंतर्गत शुरू किए गए 663 हवाई मार्गों में से 327 पर सेवाएँ बंद हो गईं। यह हवाई सेवाओं को लंबे समय तक जारी रखने में आने वाली कठिनाइयों को दर्शाता है।
  • यात्रियों की कम संख्या: क्रिसिल (CRISIL) विश्लेषण के अनुसार, उड़ान योजना के हवाई अड्डों की हिस्सेदारी घरेलू यात्री यातायात में केवल लगभग 2–3% है, जो इस नेटवर्क के बड़े हिस्से के सीमित उपयोग को दर्शाती है।
  • उच्च परिचालन लागत: छोटे विमानों, यात्रियों की कम माँग तथा सड़क और रेल परिवहन से प्रतिस्पर्धा के कारण क्षेत्रीय हवाई मार्ग व्यावसायिक रूप से अलाभकारी हो सकते हैं।
  • अवसंरचना एवं नियोजन संबंधी कमियाँ: कुछ हवाई अड्डे अभी भी गैर-परिचालन या अपर्याप्त रूप से उपयोग किए जा रहे हैं। वहीं, माँग का कमजोर आकलन और रखरखाव की निरंतर लागत दीर्घकालिक हवाई संपर्क को प्रभावित कर सकती है।
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