संदर्भ  

हाल ही में, उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया है कि उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन (SCBA) की कार्यकारी समिति में कम से कम एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होनी चाहिए।

अन्य संबंधित जानकारी  

  • उपर्युक्त निर्देश में कोषाध्यक्ष पद सहित महिला सदस्यों के लिए समिति की एक-तिहाई सीटें आरक्षित करना शामिल है।
  • हालाँकि, सभी योग्य महिला सदस्य किसी भी पद के लिए चुनाव लड़ सकती हैं।

न्यायालय द्वारा आरक्षण के लिए निर्दिष्ट किये गए मानदंड निम्नलिखित है:

  • कार्यकारी समिति में 9 में से कम से कम 3 सीटें (एक-तिहाई) महिलाओं के लिए आरक्षित होगी।
  • वरिष्ठ कार्यकारी सदस्यों के 6 में से कम से कम 2 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होगी।
  • एक पदाधिकारी पद चक्रीय आधार पर महिला उम्मीदवार के लिए विशेष रूप से आरक्षित होना चाहिए।
  • आगामी 2024-2025 चुनाव हेतु, कार्यकारी समिति में कोषाध्यक्ष पद महिला उम्मीदवार के लिए आरक्षित है।

विधिक पेशों में महिलाएँ

वर्तमान स्थिति:

  • वर्तमान में, उच्चतम न्यायालय के 33 न्यायाधीशों में से केवल 3 महिलाएँ हैं, जो कुल क्षमता का लगभग 9 प्रतिशत है। 
  • विधि मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए 2022 के आँकड़ों के अनुसार भारत में केवल 15 प्रतिशत अधिवक्ता ही महिलाएँ हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ:

  • उच्चतम न्यायालय के इतिहास में कुल 268 न्यायाधीशों में से केवल 11 महिलाएँ न्यायाधीश   रही हैं। 
  • अन्य शब्दों में, उच्चतम न्यायालय के सभी न्यायाधीशों में से केवल 4.1 प्रतिशत न्यायाधीश महिलाएँ रही हैं, जबकि शेष 96 प्रतिशत न्यायाधीश पुरुष हैं। 
  • उच्च न्यायालय की तुलना में जिला न्यायालय स्तर पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व अधिक है।

हालिया घटनाक्रम:

  • वर्ष 2021 में, तीन महिलाओं को एक साथ उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया। 
  • इस वर्ष, नए नियुक्त वरिष्ठ अधिवक्ताओं में से 20 प्रतिशत महिलाएँ थीं, जो कि इस दिशा में एक उल्लेखनीय वृद्धि है। 
  • वर्ष 2027 में, न्यायमूर्ति नागरत्ना के भारत की प्रथम महिला मुख्य न्यायाधीश बनने की संभावना 

दिशानिर्देश का महत्व

  • यह निर्देश कानूनी पेशे में लैंगिक समानता और समावेशिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम है।
  • महिलाओं के प्रतिनिधित्व और सशक्तिकरण की वकालत करने के माध्यम से, न्यायपालिका अधिक न्यायसंगत और न्यायपूर्ण समाज का मार्ग प्रशस्त करती है।

उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन के बारे में  

  • यह सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के नियम XXI के तहत पंजीकृत है। इसका उद्देश्य न्यायालय और अन्य कानूनी संघों में पेशेवर अधिवक्ताओं के बीच एकता और सहयोग को बढ़ावा देना है।
  • कानून पेशेवरों का हकदार प्रत्येक अधिवक्ता नियमों के अधीन रहते हुए एसोसिएशन में सदस्यता के लिए पात्र है।
  • उपयुक्त आवेदकों को शुरू में दो वर्ष के लिए अस्थायी सदस्यता प्रदान की जाती है, जिसके बाद वे नियमित सदस्यता के लिए आवेदन कर सकते हैं।
  • एसोसिएशन के मामलों के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार कार्यकारी समिति में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और 15 सदस्य शामिल हैं, जिनमें से कम से कम 6 वरिष्ठ अधिवक्ताओं का पदनाम रखते   हैं।

निष्कर्ष

उच्चतम न्यायालय का यह निर्देश एक महत्वपूर्ण कदम है। यह निर्देश विधिक समुदाय में विविधता को बढ़ाने के साथ-साथ सभी अधिवक्ताओं के लिए एक निष्पक्ष और समावेशी वातावरण को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। 

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