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सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।
संदर्भ: हाल ही में, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स, महेंद्रगिरि में CE20 क्रायोजेनिक इंजन का सफल समुद्र-स्तरीय ‘हॉट टेस्ट’ किया।
अन्य संबंधित जानकारी
- इस परीक्षण का उद्देश्य CE20 इंजन की उन्नत 22-टन प्रणोद (thrust) क्षमता को वैधता प्रदान करना था, जो भारत के भारी-वजन वाले रॉकेट LVM3 के ऊपरी चरण को शक्ति प्रदान करता है।
- यह विकास LVM3 के आगामी C32 क्रायोजेनिक चरण का उपयोग करके भविष्य के मिशनों की पेलोड क्षमता बढ़ाने के इसरो के प्रयासों का हिस्सा है।
- CE20 इंजन को ‘गगनयान’ मिशन के लिए ‘ह्यूमन-रेटेड’ किया गया है, जिस कारण यह परीक्षण आगामी मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान मिशनों के लिए महत्वपूर्ण बन जाता है।
परीक्षण के मुख्य बिंदु
- उच्च प्रणोद का प्रदर्शन: CE20 इंजन ने 22-टन प्रणोद पर सफलतापूर्वक कार्य किया, जो पहले प्रमाणित लगभग 19 टन के प्रणोद स्तर से अधिक है; यह कम प्रणोद स्तरों पर किए गए पिछले परीक्षणों की तुलना में संवर्धित क्षमता को प्रदर्शित करता है।
- समुद्र-स्तरीय परीक्षण की चुनौतियाँ: उच्च ‘क्षेत्रफल-अनुपात नोजल’ वाले क्रायोजेनिक इंजन निर्वात परिस्तिथियों के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं; ‘फ्लो सेपरेशन’, कंपन और तापीय प्रतिबल के जोखिमों के कारण समुद्र-स्तर पर उनका परीक्षण करना कठिन होता है।
- उन्नत प्रणालियों का उपयोग: परीक्षण में तकनीकों का उपयोग किया गया जैसे:
- नोजल सुरक्षा प्रणाली (NPS) सतही परीक्षण के दौरान इंजन के नोजल की सुरक्षा के लिए।
- मल्टी-एलिमेंट प्रज्वलक इंजन के विश्वसनीय प्रज्वलन को सुनिश्चित करने के लिए।
परीक्षण का महत्व
- संवर्धित पेलोड क्षमता: 22-टन प्रणोद वाले CE20 इंजन का प्रमाणीकरण LVM3 प्रक्षेपण यान के उन्नत C32 क्रायोजेनिक चरण का समर्थन करता है, जिससे भारी उपग्रहों, वाणिज्यिक भू-स्थिर कक्षा (GEO) पेलोड और भविष्य के मिशनों के प्रक्षेपण में सहायता मिलेगी।
- मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए महत्वपूर्ण: यह सफल परीक्षण गगनयान मिशन के लिए ‘ह्यूमन-रेटेड’ CE20 इंजन की विश्वसनीयता को बढ़ाता है, जो भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन की तैयारियों में उल्लेखनीय प्रगति है।
- स्वदेशी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को बढ़ावा: पूर्णतः स्वदेशी क्रायोजेनिक प्रणोदन प्रौद्योगिकियों—जिसमें मल्टी-एलिमेंट प्रज्वलक, टर्बोपंप घटक और नोजल सुरक्षा प्रणाली सम्मिलित हैं—का प्रदर्शन उन्नत रॉकेट इंजनों में तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए भारत के प्रयासों को बल प्रदान करता है।
- भारत की अंतरिक्ष क्षमता का विस्तार: उच्च-प्रणोद युक्त क्रायोजेनिक प्रणोदन डीप स्पेस मिशनों, बड़े संचार उपग्रहों के प्रक्षेपण और उच्च-आवृत्ति वाले प्रक्षेपण कार्यों को संचालित करने की भारत की क्षमता को बढ़ाता है, जिससे अग्रणी अंतरिक्ष देशों के बीच देश की स्थिति और बेहतर होती है।
CE20 और LVM3 के बारे में
- CE20 क्रायोजेनिक इंजन
- CE20 क्रायोजेनिक इंजन इसरो (ISRO) द्वारा विकसित भारत का सबसे बड़ा क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन है।
- इसमें ईंधन के रूप में तरल हाइड्रोजन और ऑक्सीकारक के रूप में तरल ऑक्सीजन का उपयोग होता है, जो ऊपरी चरण के प्रणोदन के लिए उच्च दक्षता प्रदान करता है।
- यह इंजन LVM3 के ऊपरी क्रायोजेनिक चरण को शक्ति प्रदान करता है और उच्च-ऊर्जा प्रणोदन की आवश्यकता वाले मिशनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- LVM3 प्रक्षेपण यान
- LVM3 प्रक्षेपण यान (पूर्व में GSLV Mk-III) भारत का सबसे शक्तिशाली परिचालन रॉकेट है।
- यह निम्नलिखित के प्रक्षेपण में सक्षम है: भू-स्थिर अंतरण कक्षा (GTO) में भारी संचार उपग्रह, डीप स्पेस मिशन के लिए अंतरिक्ष यान और गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए क्रू मॉड्यूल।
- उच्च-प्रणोद वाले CE20 इंजन और उन्नत क्रायोजेनिक चरण जैसे सुधारों के साथ, आने वाले वर्षों में LVM3 से भारत की प्रक्षेपण क्षमताओं का उल्लेखनीय विस्तार होने की अपेक्षा है।
