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सामान्य अध्ययन-3: सूचना प्रौद्योगिकी,अंतरिक्ष के क्षेत्र में जागरूकता।
संदर्भ: हाल ही में, नासा (NASA) ने अपने स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट में तकनीकी देरी के कारण आर्टेमिस कार्यक्रम में प्रमुख संरचनात्मक परिवर्तन करने की घोषणा की।
अन्य संबंधित जानकारी
• यह निर्णय इसलिए लिया गया है क्योंकि फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर में आर्टेमिस II मिशन की तैयारियों के दौरान कई तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा था।
• इन तकनीकी चिंताओं के कारण, आर्टेमिस II के प्रक्षेपण को स्थगित कर दिया गया है, और अब इसके अप्रैल 2026 से पहले प्रक्षेपित होने की संभावना नहीं है।
• इस पुनर्संरचना में एयरोस्पेस सुरक्षा सलाहकार पैनल की सिफारिशों का भी प्रभाव रहा है, जिसने चेतावनी दी थी कि मूल आर्टेमिस III चंद्रमा लैंडिंग योजना में महत्वपूर्ण जोखिम शामिल थे।
आर्टेमिस कार्यक्रम में महत्वपूर्ण बदलाव
• नासा ने आर्टेमिस कार्यक्रम की पहली मानवयुक्त चंद्रमा लैंडिंग को 2028 तक के लिए टाल दिया है। अब चंद्रमा पर उतरने का लक्ष्य आर्टेमिस III के बजाय आर्टेमिस IV को दिया गया है।
• वर्ष 2027 में एक अतिरिक्त परीक्षण मिशन शुरू किया गया है। इसके तहत आर्टेमिस III चंद्रमा पर उतरने का प्रयास करने के बजाय केवल प्रौद्योगिकी प्रदर्शन करेगा।
• आर्टेमिस III अब पृथ्वी की निचली कक्षा में स्पेसएक्स (SpaceX) और ब्लू ओरिजिन द्वारा विकसित किए जा रहे वाणिज्यिक ‘ह्यूमन लैंडिंग सिस्टम’ वाहनों के साथ डॉकिंग और सिस्टम एकीकरण परीक्षण करेगा।
• चंद्रमा पर उतरने से पहले यह मिशन स्वायत्त डॉकिंग, जीवन रक्षक प्रणाली एकीकरण, प्रणोदन इंटरफेस और अगली पीढ़ी के स्पेससूट जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों का सत्यापन करेगा।
• इस पुनर्गठन का उद्देश्य प्रक्षेपण की आवृत्ति को बढ़ाना है, जिससे आर्टेमिस मिशनों के बीच के अंतराल को लगभग तीन साल से घटाकर एक वर्ष से भी कम किया जा सके।
• यह कार्यक्रम प्रणालियों के परीक्षण और जोखिमों को कम करने के लिए अपोलो कार्यक्रम के समान एक चरण-दर-चरण मिशन दृष्टिकोण अपनाएगा।
आर्टेमिस कार्यक्रम के बारे में
• नासा का आर्टेमिस कार्यक्रम एक बहु-मिशन चंद्र अन्वेषण अभियान है, जिसे 1972 के बाद पहली बार चंद्रमा पर मानवीय उपस्थिति फिर से स्थापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
• यह कार्यक्रम अंतरिक्ष यात्रियों और कार्गो को गहरे अंतरिक्ष में ले जाने के लिए स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान का उपयोग करता है।
• यह एक चरणबद्ध दृष्टिकोण का पालन करता है, जिसकी शुरुआत मानव रहित परीक्षण मिशनों से होती है, जिसके बाद मानवयुक्त चंद्र फ्लाईबाई और अंततः चंद्रमा पर मानव लैंडिंग होती है।
• इसका उद्देश्य लूनर गेटवे के विकास के माध्यम से दीर्घकालिक अन्वेषण का समर्थन करना और भविष्य के मंगल मिशनों के लिए आधार तैयार करना है।
| मिशन | वर्तमान मुख्य उद्देश्य | लक्षित तिथि |
| आर्टेमिस I | मून (चंद्रमा) के चारों ओर स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट और ओरियन (Orion) अंतरिक्ष यान की मानवरहित परीक्षण उड़ान का सफल समापन, जिसने गहरे अंतरिक्ष मिशनों के लिए प्रमुख प्रणालियों को मान्य किया। | नवंबर 2022 |
| आर्टेमिस II | आर्टेमिस कार्यक्रम का पहला मानवयुक्त मिशन; चार अंतरिक्ष यात्री जीवन-रक्षक प्रणालियों और गहरे अंतरिक्ष नेविगेशन के परीक्षण के लिए चंद्रमा के चारों ओर से उड़ान भरेंगे। | अप्रैल 2026 |
| आर्टेमिस III | लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में प्रौद्योगिकी पूर्वाभ्यास मिशन ताकि स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन द्वारा विकसित वाणिज्यिक चंद्र लैंडर्स के साथ मिलन और डॉकिंग, तथा एक्सिओम स्पेस द्वारा निर्मित नए स्पेससूट का परीक्षण किया जा सके। | मध्य-2027 |
| आर्टेमिस IV | आर्टेमिस युग की पहली मानव लैंडिंग, जिसके तहत 1972 के बाद पहली बार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह पर वापस उतारा जाएगा। | पूर्वार्ध 2028 |
| आर्टेमिस V और उससे आगे | चंद्रमा पर निरंतर मानवीय उपस्थिति के उद्देश्य से विस्तार चरण, जिसमें दूसरी मानवयुक्त लैंडिंग और आर्टेमिस बेस कैंप तथा चंद्र बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है। | उतरार्ध 2028 और उसके बाद |
