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संदर्भ: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका को बाहर कर दिया है, जिनमें कई ऐसे संगठन भी शामिल हैं जो जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में काम करते हैं।
अन्य संबंधित जानकारी:
• 35 गैर-संयुक्त राष्ट्र निकाय और 31 संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं से बाहर होने के इस निर्णय को 7 नवंबर, 2025 को हस्ताक्षरित राष्ट्रपति ज्ञापन के माध्यम से औपचारिक रूप दिया गया।
• अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक आधिकारिक बयान देते हुए कहा कि ये संगठन “अब अमेरिकी हितों की पूर्ति नहीं करते” और ऐसे एजेंडे को आगे बढ़ाते हैं जो “अप्रभावी या शत्रुतापूर्ण” हैं।
विश्व पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव:
• जलवायु प्रशासन से अलगाव: अमेरिका अब ‘कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज’ (COP) का पक्षकार नहीं रहेगा। वह उत्सर्जन रिपोर्टिंग और समीक्षा प्रणाली से बाहर हो जाएगा और वैश्विक जलवायु नियमों को भीतर से आकार देने का उसका अधिकार समाप्त हो जाएगा।
- UNEP की उत्सर्जन अंतराल रिपोर्ट 2025 के अनुसार, इस सदी में विश्व वर्तमान में वैश्विक तापन 2.3-2.8°C की राह में अग्रसर है जो पेरिस समझौते के लक्ष्यों से बहुत अधिक है। अकेले पेरिस समझौते से अमेरिका के बाहर होने से वैश्विक तापमान में लगभग 0.1°C की वृद्धि होने की संभावना है।
• वैश्विक जलवायु संरचना को कमजोर करता है: अमेरिका की औपचारिक भागीदारी के बिना, विश्व जलवायु वार्ताओं में एक प्रमुख वार्ताकार को खो देगा, जिससे संभावित रूप से वैश्विक जलवायु सहयोग में कमी आ सकती है और अन्य देशों के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करने का प्रोत्साहन कम हो सकता है।
• सबसे बड़ा ऐतिहासिक प्रदूषक बाहर हो रहा है: अमेरिका जलवायु परिवर्तन में विश्व के सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक है।
- ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट के अनुसार, 2024 में अमेरिका का क्षेत्रीय CO2 उत्सर्जन लगभग 4.9 बिलियन टन था—जो वैश्विक उत्सर्जन का लगभग 12.7 प्रतिशत है। प्रति व्यक्ति उत्सर्जन लगभग 14.6 टन रहा, जो वैश्विक औसत से काफी अधिक है।
- ऐतिहासिक रूप से, अमेरिका जीवाश्म ईंधन और उद्योग से होने वाले CO2 के संचयी उत्सर्जन के मामले में सबसे बड़ा एकल उत्सर्जक बना हुआ है, जो कुल उत्सर्जन का लगभग 24 प्रतिशत उत्सर्जन करता है।

• जलवायु वित्त अंतराल और वैश्विक विश्वास: जलवायु वित्त अधिक अनिश्चित हो जाएगा और इससे विश्व भर में नवीकरणीय ऊर्जा की ओर संक्रमण, हरित प्रौद्योगिकी निवेश और स्वच्छ बुनियादी ढांचे की योजना बनाने में विलंब हो सकता है।
- अज़रबैजान में 2024 में हुए COP29 में, सरकारों ने 2035 तक प्रति वर्ष कम से कम $300 बिलियन के नए सामूहिक लक्ष्य पर सहमति जताई।
• बहुपक्षवाद का कमजोर होना: यह एक अनुचित उदाहरण पेश करता है कि शक्तिशाली देश “असुविधा होने पर” वैश्विक सहयोग समझौतों से बाहर हो जाते हैं, जो संभावित रूप से नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को कमजोर कर सकता है।
प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ और निकाय जिनसे अमेरिका बाहर हो चुका है:
• 31 संयुक्त राष्ट्र और संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध निकाय, जैसे कि UNFCCC, संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक मामलों का विभाग (UN DESA), संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) आदि।
- पेरिस समझौता UNFCCC के तहत एक प्रोटोकॉल है और ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिका ने इससे दो बार (2020 और 2025 में) अपनी वापसी की थी।
• 35 गैर-संयुक्त राष्ट्र वैश्विक संगठन, जैसे कि अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा मंच, अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) इत्यादि।
अन्य ऐतिहासिक वापसी:
- WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) —जनवरी 2026 से
- UNESCO (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) — 2019 में
- 2018 में UN मानवाधिकार परिषद (UNHRC)
