संदर्भ  

जीएसटी संग्रह बढ़कर रिकॉर्ड 2.10 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो साल-दर-साल 12.4 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है।  

मुख्य अंश   

  • रिफंड को हटाने के बाद, अप्रैल 2024 का शुद्ध जीएसटी राजस्व 1.92 लाख करोड़ रुपये है, जो गत वर्ष की तुलना में 15.5 प्रतिशत अधिक है।
  • इससे पहले, अप्रैल, 2023 में जीएसटी संग्रह का उच्चतम आँकड़ा 1.87 लाख करोड़ रुपये था।

जीएसटी संग्रह में बढ़ोतरी के कारण:

  • जीएसटी संग्रह के वृद्धि के एक हिस्से को वित्तीय वर्ष के अंत में गतिविधि में होने वाली सामान्य वृद्धि को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
  • केंद्रीय और राज्य जीएसटी प्राधिकरणों द्वारा जीएसटी ऑडिट पर लगातार ध्यान देने से व्यवसायों को अपने अनुपालन प्रयासों को बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
  • कर चोरी करने वालों के विरुद्ध सख्त दंड और प्रवर्तन कार्रवाई ने निवारक के रूप में काम किया है।
  • राजनीतिक दलों द्वारा चुनावी व्यय में बढ़ोतरी और ग्रामीण खपत में मामूली सुधार के कारण यह देखने को मिला है। 

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के बारे में

• वस्तु एवं सेवा कर पर एक नजर 

  • वस्तु एवं सेवा कर “एक राष्ट्र, एक कर” के विचार पर आधारित अखिल भारतीय एक अप्रत्यक्ष कर है।
  • यह प्रमुख केंद्रीय और राज्य अप्रत्यक्ष करों के विलय का परिणाम है।

• स्थान-आधारित कराधान: यह देश भर में वस्तुओं और सेवाओं की खपत पर लगाया जाने वाला एक स्थान-आधारित कर है, जो देश के लिए एक एकीकृत सामान्य बाजार को सृजित करता है।

  • स्थान-आधारित कर उस राज्य में लगाया जाता है, जहाँ वस्तुओं या सेवाओं का उपभोग किया जाता है, न कि जहाँ उनका उत्पादन किया जाता है।
  • क्रियान्वयन: यह 101वें संविधान संशोधन अधिनियम (अनुच्छेद 246A) के अंतर्गत 1 जुलाई, 2017 से लागू है।

करों का समावेश

  • केंद्रीय स्तर पर, जीएसटी में केंद्रीय उत्पाद शुल्क, अतिरिक्त उत्पाद शुल्क, सेवा कर, अतिरिक्त सीमा शुल्क (प्रतिकारी शुल्क) तथा विशेष अतिरिक्त सीमा शुल्क को शामिल किया गया है।
  • राज्य स्तर पर, इसमें राज्य मूल्य वर्धित कर/बिक्री कर, मनोरंजन कर, चुंगी और प्रवेश कर, खरीद कर, विलासिता कर, लॉटरी, सट्टेबाजी और जुए पर लगाने वाले कर आदि को शामिल किया गया है।

दोहरा जीएसटी

  • यह एक दोहरी जीएसटी प्रणाली के रूप में कार्य करती है, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों साझा आधार पर कर लगाते हैं।
  • केंद्र के कर को केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) कहा जाता है तथा राज्य के कर को राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) कहा जाता है।

आयात का निरूपण

  • आयातित वस्तुओं या सेवाओं को अंतरराज्यीय आपूर्ति माना जाता है तथा वे लागू सीमा शुल्क के साथ एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (आईजीएसटी) के अधीन आते हैं।

कर स्लैब और जीएसटी परिषद

  • जीएसटी को चार दरों अर्थात, 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत पर लागू किया जाता है तथा प्रत्येक स्लैब के अंतर्गत आने वाली विशिष्ट वस्तुएँ जीएसटी परिषद द्वारा निर्धारित की जाती हैं।
  • जीएसटी परिषद की सिफारिश के अनुसार, सीजीएसटी, एसजीएसटी और आईजीएसटी दरों पर केंद्र और राज्य संयुक्त रूप से सहमत होते हैं।

जीएसटी के फायदे

  • इसके अंतर्गत कर आधार का विस्तार वस्तुओं और सेवाओं की एक व्यापक श्रेणी को कवर करने के लिए किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप कर संग्रह में वृद्धि हुई है।
  • इससे पूरे भारत में एकीकृत बाजार का निर्माण संभव हुआ और अनुपालन लागत कम हुई।
  • इसने कर कैस्केडिंग को समाप्त करके विनिर्माण और वितरण दक्षता को बढ़ाया है।
  • इससे मुकदमेबाजी भी कमी आई है, जिससे उद्यमियों को अपने कारोबार पर अधिक ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली है।
  • इससे प्रशासनिक लागत कम हुई है, पारदर्शिता बढ़ी है, तथा समग्र दक्षता में सुधार हुआ है।
  • इसमें आयातित वस्तुओं पर कर को 5 से 10 प्रतिशत तक कम कर दिया गया है।

जीएसटी के नुकसान

  • राज्य अतिरिक्त उपकर और अधिभार लगाने पर आपत्ति करते हैं, क्योंकि उपकर और अधिभार कर पूल पर केंद्र का विशेष अधिकार है।
  • एसजीएसटी और सीजीएसटी इनपुट क्रेडिट को आपस में बदला नहीं जा सकता है। सीजीएसटी के प्रति कर देयता को समायोजित करने के बाद सीजीएसटी के किसी भी इनपुट क्रेडिट शेष का उपयोग एसजीएसटी के विरुद्ध समायोजन के लिए नहीं किया जा सकता है।
  • विनिर्माण राज्यों को काफी अधिक राजस्व घाटे का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण इनमें नुकसानों के मुआवजे को लेकर चिंताएँ पैदा होती हैं।
  • कुछ राज्य जीएसटी परिषद में निर्णय लेने की प्रक्रिया के बारे में चिंता व्यक्त करते हुए जीएसटी नीतियों को निर्धारित करने में अधिक स्वायत्तता चाहते हैं।
  • यह केवल कागजों पर एक राष्ट्र, एक कर है और कई कर स्लैब की उपस्थिति के कारण व्यावहारिक नहीं है।

आगे की राह   

  • विनिर्माण राज्यों के लिए समान मुआवजा प्रदान करना।
  • कर दरों की नियमित रूप से समीक्षा करना और उन्हें तर्कसंगत बनाना।
  • पंजीकरण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना।
  • अतिरिक्त उपकर पर निर्भरता को कम करना।
  • प्रभावी जीएसटी के क्रियान्वयन के लिए जीएसटी परिषद संवाद को बढ़ाना।  

जीएसटी परिषद के बारे में

  • मुख्य जिम्मेदारियाँ: कर की दरें, अतिरिक्त प्रतिकर लगाने की अवधि, आपूर्ति के सिद्धांत, छूट की सीमाएँ और राज्यों के लिए विशेष प्रावधानों की संस्तुति करना। 
  • संवैधानिक अधिदेश: जीएसटी को प्रशासित और नियंत्रित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 279 A के तहत परिषद की स्थापना की गई।  

संरचना:   

  • केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में, राज्य सरकार द्वारा मनोनीत मंत्री इसके सदस्य होते हैं।
  • केंद्र के पास 1/3 मतदान शक्ति होती है, जबकि राज्यों के पास सामूहिक रूप से 2/3 मतदान शक्ति होती है।
  • निर्णय लेने की प्रक्रिया: इसमें निर्णय लेने हेतु 3/4 बहुमत की आवश्यकता होती है, जो कि इसके सदस्यों के बीच आम सहमति को सुनिश्चित करता है।
  • विवाद समाधान: परिषद अपनी सिफारिशों से उत्पन्न विवादों का समाधान करने हेतु तंत्र तैयार करती है।   

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